पूर्णता प्राप्त नहीं हो सकती ।
लेकिन यदि हम पूर्णता प्राप्त करने का प्रयत्न करते रहें
तो हम उत्कृष्टता तक पहुँच सकते हैं
जीवन में जब द्वन्द बढ़ने लगे हृदय जब दुःखों से बिखरने लगे तो लेना प्रभु का सहारा प्रिये दर उसका खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए ...
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