जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥
" रामचरित मानस "
अर्थ :
हे नाथ ! पुराण और वेद ऐसा कहते हैं कि सुबुद्धि (अच्छी बुद्धि, अच्छे विचार और सद्भावना) और कुबुद्धि (खोटी बुद्धि, इर्ष्य,द्वेष,एवं बुरे विचार) सबके हृदय में रहती है।
दुसरे शब्दों में - केवल मात्रा का ही अंतर होता है। आम तौर पर हर इंसान के मन में कुछ न कुछ सदभावना और दुर्भावना - अच्छे और बुरे विचार उठते ही रहते हैं।
कुछ लोगों के मन में अधिकतर सद्भावना और अच्छे विचार ही उठते हैं और कुछ लोगों के मन में हमेशा दूसरों के प्रति दुर्भावना ही रहती है।
संत तुलसीदास जी कहते हैं कि जहाँ सुबुद्धि है, वहाँ नाना प्रकार की सम्पदाओं, सुख समृद्धि एवं शांति का निवास रहता है
और जहाँ कुबुद्धि है वहाँ विभिन्न प्रकार की विपत्तियों एवं दुःख का वास रहता है।
अर्थात यदि विचारों को बदल लें तो जीवन बदल सकता है।
यदि मन में अच्छे विचार और सबके प्रति सद्भावना होगी - किसी के प्रति ईर्ष्या और द्वेष की भावना नहीं रहेगी तो मन शांत रहेगा और जीवन में सुख एवं शान्ति बनी रहेगी।
" राजन सचदेव "
