हमारे पाँव का काँटा हमीं से निकलेगा
(राहत इंदौरी)
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जीवन में सुख, दुःख और संघर्षों का सामना करने की ज़िम्मेदारी अंततः स्वयं अपनी ही होती है।
जीवन का बोझ—दुःख और मुश्किलें —किसी और पर नहीं डाले जा सकते।
ये संघर्ष हमारे अपने हैं।
हमारे पैरों में चुभे काँटे—अर्थात जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ और बाधाएँ—कोई दूसरा नहीं निकाल सकता।
दूसरे लोग हमें सांत्वना दे सकते हैं - हमें दिलासा दे सकते हैं और हमारे साथ खड़े भी हो सकते हैं, लेकिन हमारी लड़ाई वो नहीं लड़ सकते।
जीवन की मुश्किलें, परेशानियाँ या बाधाएं किसी दूसरे के द्वारा नहीं, बल्कि अपने स्वयं के प्रयासों से ही सुलझाई जा सकती हैं।
साथी और मित्रगण हमें सहारा दे सकते हैं—हमें ढाढ़स बँधा कर दुःख को कम कर सकते हैं -
हमें रास्ता दिखा सकते हैं - हमारा मार्गदर्शन कर सकते हैं - लेकिन वो हमारे लिए चल कर हमारा मार्ग तय नहीं कर सकते।
वास्तविक समाधान हमारे अपने प्रयास और आत्म-बोध से ही निकलता है।
यह सत्य हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में दृढ़ रहने, संघर्ष करने, सीखने और अपना मार्ग स्वयं खोजने के लिए प्रेरित करता है।
सच्ची शक्ति उसी क्षण जन्म लेती है जब हम अपनी ज़िम्मेदारी को स्वीकार कर लेते हैं।
इस आंतरिक ज़िम्मेदारी की भावना से ही शक्ति उत्पन्न होती है और विकास संभव होता है।
" राजन सचदेव "

