फ़लक देता है जिन को ऐश उन को ग़म भी होते हैं
जहाँ बजते हैं नक़्क़ारे - वहाँ मातम भी होते हैं
" दाग़ देहलवी "
सुख पाने वालों को - दुख भी होते हैं।
जहाँ हर्षोल्लास के नगाड़े बजते हैं - वहाँ शोक भी होते हैं।
कबीर एह तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास एह तन जलता देख के भयो कबीर...
Absolutely!
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