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छोड़ा नहीं किसी को भी यलग़ार-ए-वक़्त ने Time’s relentless onslaught spares no one
बरपा किए वो दौरे ज़माने तग़य्युरात गाड़ी नई थी जिसका खटारा बना दिया छोड़ा नहीं किसी को भी यलग़ार-ए-वक़्त ने आख़िर खजूर को भी छुआरा बना दिया ...
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लालयेत पंच वर्षेषु - दश वर्षेषु ताड़येत प्राप्ते तु षोडशे वर्षे - पुत्रे मित्र वदाचरेत Laalyait Panch varsheshu - Dash varsheshu Taadyait ...
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मध्यकालीन युग के भारत के महान संत कवियों में से एक थे कवि रहीम सैन - जिनकी विचारधारा आज भी उतनी ही प्रभावशाली है जितनी उनके समय में थी। कव...
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बाख़ुदा -अब तो मुझे कोई तमन्ना ही नहीं फिर ये क्या बात है कि दिल कहीं लगता ही नहीं सिर्फ चेहरे की उदासी से भर आए आँसू दिल का आलम तो अ...
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