Wednesday, March 6, 2024

ख़ुर्राटे

ग़लती, गुस्सा, लालच, हठ, अभिमान, 
निंदा और अपमान इत्यादि ख़ुर्राटों की तरह होते हैं। 
ख़ुद करें तो पता भी नहीं चलता 
मगर कोई और करे तो बहुत बुरा लगता है। 
हम परेशान हो जाते हैं - उन पर क्रोध आने लगता है। 
 
लेकिन ये तभी होता है जब कोई दूसरा करे -
स्वयं करें तो सब ठीक लगता है।
                   "राजन सचदेव " 

6 comments:

कबीर गर्व न कीजिए

कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग  आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास  आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...