Tuesday, March 26, 2024

वो बुलबुला जो सर उठा के चला

हवा वही - वही क़तरा  - समंदर भी वही है
जो सर उठा के चला था वो बुलबुला नहीं रहा


6 comments:

कबीर गर्व न कीजिए

कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग  आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास  आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...