हमारी आँख से टपका हुआ है
मुक़द्दर में लिखा था जो न मेरे
वो दाना दांत में अटका हुआ है
(लेखक : नामालूम)
सुख़नवरी में बस इतना कमाल वाजिब हो अधूरी बात में पूरा ख़्याल वाजिब हो ख़ुदा करे कि मैं उस ज़ावीऐ से देख सकूं जहां से आपके अंदर का हाल वाजिब ह...
👌👌👌🙏
ReplyDeleteवाह वाह
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