Friday, March 22, 2024

जो आँसू फैल कर दरिया हुआ है

जो आँसू फैल कर दरिया हुआ है 
हमारी आँख से टपका हुआ है 

मुक़द्दर में लिखा था जो न मेरे 
वो दाना दांत में अटका हुआ है
           (लेखक : नामालूम)

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...