हमारी आँख से टपका हुआ है
मुक़द्दर में लिखा था जो न मेरे
वो दाना दांत में अटका हुआ है
(लेखक : नामालूम)
कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...
👌👌👌🙏
ReplyDeleteवाह वाह
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