फूल कितना भी सुन्दर हो -
तारीफ़ ख़ुशबू से होती है
इंसान कितना भी बड़ा हो -
क़दर उसके गुणों से होती है
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Dhan Nirankar 🙏🙏🙏🙏
(Scroll down for English version) एक अनेक ब्यापक (व्यापक) पूरक जत्त देखूं तत सोई । माया चित्र बचित्र बिमोहित, विरला बूझै कोई ।। सब गोविन्द...
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ReplyDeleteDhan Nirankar
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