Saturday, February 24, 2024

अच्छाई और बुराई

अच्छाई और बुराई - दोनों ही संसार में मौजूद हैं। 
ये हम पर निर्भर करता है कि हम दोनों में से क्या चुनते हैं। 

अच्छे और सही मार्ग का चुनाव हमने स्वयं करना है। 
क्योंकि अंततः हमें फल तो हमारे अपने कर्म अनुसार ही मिलेगा।
                                   "  राजन सचदेव "

1 comment:

सुमति कुमति सब कै मन माहिं

    सुमति कुमति सबके उर रहहीं। नाथ पुरान निगम अस कहहीं॥     जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥                         ...