Thursday, February 29, 2024

ये सदी हमको कहाँ ले जाएगी

ये सदी हमको कहाँ ले जाएगी 
तीरगी हमको कहाँ ले जाएगी 

पूछती हैं मछलियों से मछलियां 
ये नदी हमको कहाँ ले जाएगी 

जुगनुओं के जिस्म से निकली हुई
रोशनी हमको कहाँ ले जाएगी 
                  " सुरेंद्र शास्त्री "

तीरगी     = अंधेरा 

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...