Saturday, February 17, 2024

पश्चाताप और चिंता

पश्चाताप या पछतावा चाहे कितनी भी भारी मात्रा में क्यों न हो -
अतीत को नहीं बदल सकता 

चिंता चाहे कितनी भी भारी मात्रा में क्यों न की जाए  -
भविष्य को नहीं बदल सकती 

लेकिन स्वीकृति और कृतज्ञता की भावनाएँ हमारी वर्तमान मनःस्थिति को बदल सकती हैं।

परिस्थितियों को शालीनता से स्वीकार करने - 
और हालात से समझौता कर लेने से मन की वर्तमान स्थिति को बदला जा सकता है।
                            " राजन सचदेव "

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...