Friday, May 12, 2023

नीचो वदति न कुरुते - जो गरजते हैं वो बरसते नहीं

        शरदि न वर्षति गर्जति - वर्षति वर्षासु नि:स्वनो मेघ: 
        नीचो वदति न कुरुते - न वदति सुजन: करोत्येव 
                                                   (सुभाषितम)

शब्दार्थ: 
शरद ऋतु में बादल गरजते हैं - बरसते नहीं  
वर्षा ऋतु में - बरसात के मौसम में बरसते हैं - गरजते नहीं । 
निम्न प्रकार के साधारण लोग बातें करते हैं - करते कुछ नहीं।
सुजन - सज्जन पुरुष बोलते नहीं - काम करते हैं।
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साधारण लोग केवल पतझड़ और सर्दियों के बादलों की तरह बातें तो बहुत करते हैं - बहुत शोर करते हैं - 
लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए कोई कर्म नहीं करते।
दूसरी ओर - सज्जन पुरुष केवल बातें नहीं करते - बल्कि चुपचाप अपना काम करते रहते हैं।
ख़ामोशी से कर्म करते रहते हैं।  
उनका ध्यान प्रदर्शन में नहीं बल्कि कर्म में होता है 
उन्हें विज्ञापन से नहीं -  कर्म से मतलब होता है 
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   भावार्थ: 
उपरोक्त सादृश्य अथवा उपमा शरद ऋतु और वर्षा ऋतु के दौरान बादलों के व्यवहार के सामान्य अवलोकन पर आधारित है।
शरद ऋतु में, बादल गरजते हैं - बहुत शोर करते हैं - लेकिन बहुत कम बरसते हैं।
दूसरी ओर वर्षा ऋतु में ये अपना काम तो करते हैं अर्थात खूब बारिश बरसाते हैं - लेकिन अधिक शोर नहीं करते।
बादल और बारिश की उपमा देकर कवि ये कहना चाहता है कि संसार में दो तरह के लोग होते हैं -
एक वे जो केवल बातें करते हैं और करते कुछ नहीं -
और दूसरे वो जो काम तो करते हैं - लेकिन बहुत बातें नहीं करते - 
अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का शोर नहीं करते।

कुछ लोग स्वयं अपने आप से और अन्य लोगों से बड़े बड़े वायदे तो कर लेते हैं 
अपनी और दूसरों की तरक्की के लिए नई नई योजनाएं बना कर बड़ी बड़ी बातें तो करते हैं 
लेकिन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में कोई ठोस काम करने का प्रयास नहीं करते और किसी भी सार्थक कार्य को पूरा करने में सफल नहीं होते।

दूसरी ओर अच्छे और समझदार लोग कभी अपने कर्मों की शेखी नहीं बघारते - अधिक बात नहीं करते। 
वे जानते हैं कि सफलता केवल शब्दों से नहीं बल्कि निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत से प्राप्त होती है।
वे जानते हैं कि केवल लक्ष्य के बारे में बात करना और योजना बनाना ही काफी नहीं है - 
वे शब्दों से अधिक काम करने के महत्व को पहचानते हैं।
इसलिए वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए चुपचाप और लगन से काम करते रहते हैं और जहाँ तक सम्भव हो - दूसरों की मदद भी करते हैं। 
                        ' राजन सचदेव '

1 comment:

  1. Very true !
    जो गरजते है वो बरसते नहीं

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