Thursday, December 8, 2022

मोहब्बत के गुलिस्तां

मोहब्बत के गुलिस्तां पर तो ख़ारों की हक़ूमत है 
जहां में अम्ल के बदले में नारों की हक़ूमत है 
ज़रा सोचो मरीज़ों को भला क्योंकर शफ़ा होगी 
शफ़ाख़ाने पे जब 'साक़ी 'बीमारों की हक़ूमत है 
                                  " पूर्ण प्रकाश साक़ी "

ख़ार          =  काँटे 
अम्ल         =  कर्म 
शफ़ा         =   इलाज़ 
शफ़ाख़ाने   = हस्पताल 

4 comments:

कबीर गर्व न कीजिए

कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग  आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास  आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...