Monday, August 3, 2015

तुम से मिलना ख़ुशी की बात सही Tum se Milnaa khushi ki baat


चंद कलियाँ निशात की चुन कर
पहरों महवे यास रहता हूँ

तुम से मिलना ख़ुशी की बात सही 
तुम से मिलकर उदास रहता हूँ

                                                             'साहिर लुध्यानवी'


Chand Kaliyaan Nishaat ki chun kar 
Peharon Mehave-yaas rehtaa hoon

Tum se Milnaa khushi ki baat sahi, 
Tum se mil ke Udaas rehtaa hoon 

                                                              'Sahir Ludhyaanvi' 


1 comment:

  1. Dhan Nirankar Uncle ji, I didn't understand this poem... Agar kissi se milne ki khawish hai toh milke udaas kyu??
    Ritika

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