यह सोचने में समय बर्बाद न करें कि आप क्या कर सकते थे -
या किस काम को कैसे - और किस ढंग से करना चाहिए था।
अब भविष्य पर नज़र रखें
और हमेशा हर काम सोच-समझ कर सही ढंग से करने की कोशिश करें।
जीवन में जब द्वन्द बढ़ने लगे हृदय जब दुःखों से बिखरने लगे तो लेना प्रभु का सहारा प्रिये दर उसका खुला है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए ...
Right sir!
ReplyDeleteVery well said Veer Ji
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