जीवन में जब द्वन्द बढ़ने लगे
हृदय जब दुःखों से बिखरने लगे
तो लेना प्रभु का सहारा प्रिये
दर उसका खुला है खुला ही रहेगा
तुम्हारे लिए - सभी के लिए
सब कुछ निरर्थक जो लगने लगे
भर जाए मन में भी गहरी निराशा
दिखता हो चारों तरफ ही अँधेरा
न आए नज़र धुंधली सी भी आशा
पाओं अगर लड़खड़ाने लगें
छाया से भी घबराने लगें
तो लेना प्रभु का सहारा प्रिये
वो करुणा का सागर दया ही करेगा
तुम्हारे लिए - सभी के लिए
जो है अनादि अनंत वही है
जिसने बनाया ये ब्रह्मांड सारा
वो ही रचयिता वही कर्ता धर्ता
वही एक है सब का पालनहारा
करो उसका चिंतन - चिंता को छोड़ो
सुमिरन में 'राजन' मन अपना जोड़ो
रखना जला के श्रद्धा के दिए
दयालु है वो तो दया ही करेगा
तुम्हारे लिए - सभी के लिए
" राजन सचदेव "
(बहर, तर्ज़ -- कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे - तब तुम मेरे पास आना प्रिये )
Perfect
ReplyDeleteThank you
Excellent!
ReplyDeleteUsi ke sahare jiye hai
ReplyDeleteआनंद और द्वंद में एक ही सहारा - प्रभु निरंकार!
ReplyDeleteआपकी यह कविता दिल को राहत देने वाली है जी।🙏🙏
Absolutely true.Bahut hee Uttam aur shikhshadayak bhav wali Rachana ji.🙏
ReplyDeleteBahut khub
ReplyDeleteWell said.....
ReplyDelete👍
ReplyDeleteExcellent
🙏
ReplyDeleteBeautiful ji. 👌🙏🙏
ReplyDeleteBeautiful 🙏🙏
ReplyDelete👍🎊👏👌very nice ji 🌷
ReplyDeleteInspiring Rajanjee 🙏🙏 Have forwarded your blog to two of my friends.
ReplyDeleteThank you
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