यह सोचने में समय बर्बाद न करें कि आप क्या कर सकते थे -
या किस काम को कैसे - और किस ढंग से करना चाहिए था।
अब भविष्य पर नज़र रखें
और हमेशा हर काम सोच-समझ कर सही ढंग से करने की कोशिश करें।
निज़ाम-ए-मैकदा बिगड़ा हुआ है इस क़दर साक़ी उसी को जाम मिलता है जिसे पीना नहीं आता ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ Nizaam-e-maikada bigadaa hua hai i...
Right sir!
ReplyDeleteVery well said Veer Ji
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