सफलता प्राप्त करने के लिए
सिर्फ कल्पना ही नहीं
सार्थक कर्म करना भी ज़रुरी है।
ऊपर जाने के लिए
सीढ़ियों को देखना ही पर्याप्त नही है
सीढ़ियों पर चढ़ना भी ज़रुरी है।
आपत्काले तु संप्राप्ते यन् मित्रं मित्रमेव तत्। वृद्धिकाले तु संप्राप्ते दुर्जनोऽपि सुहृद् भवेत्॥ अर्थात: जो विप...
Right sir!
ReplyDeleteRight mahapurso ji🌹🌹👏🏾👏🏾
ReplyDelete