Monday, July 10, 2017

निर्विचार या 'असीम विचार '

सुना है - कि विचारों से मुक्ति का नाम ही मोक्ष है।  
सोचता हूँ - क्या ये सम्भव है ?
फिर  ख़्याल आया - कि शायद विचारों से मुक्ति का अर्थ 'विचारों के बंधन' से मुक्ति हो ?

' निर्विचार ' होने से नहीं - बल्कि विचार की असीमता से ही मन एवं आत्मा असीम हो सकते हैं। 

                         ' राजन सचदेव '
   

No comments:

Post a Comment

Mujh ko bhee Tarqeeb Sikhaa de yaar Julaahay

The poems of Gulzar Sahib are not just poems – they are beautiful expression of some forgotten sores that are still hidden in the depths of...