क्योंकि ज्ञान को समझने के लिए भी ज्ञान चाहिए
लेकिन उस ज्ञान का कोई फ़ायदा नहीं जिसे जीवन में धारण न किया जाए
और ज्ञान को जीवन में धारण करने के लिए ज्ञान को याद रखना
और उस का अभ्यास करना ज़रुरी है
' राजन सचदेव '
' राजन सचदेव '
इच्छा के रहते प्राण चले जाएं तो वह मृत्यु अर्थात कालचक्र अथवा आवागमन की क्रिया का एक अंग है। और अगर प्राण के रहते इच्छाएं चली जाए तो वह मुक...
Leads to become karamyogi gyani.
ReplyDelete/Satyavan
SATYVACHAN HAZOOR🙏🌹🙏👣🙏🌹
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