अपने ग़म जो हवा में उछाल देता है
Kisi kisi ko Khuda ye kamaal deta hai
Apnay gham jo hawa mein uchaal deta hai
(Unknown)
कबीर एह तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास एह तन जलता देख के भयो कबीर...
Very nice ji.. ��
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