जो खुश होना ही नहीं चाहते,
उन्हें कोई खुश नहीं कर सकता
…..और ....
जो खुश रहने का हुनर रखते हैं
उन्हें खुश रहने से कोई रोक नहीं सकता।।
गूंगों को तकल्लुम के मवाक़े हैं मयस्सर और माहिर-ए-गुफ़्तार बड़ी देर से चुप हैं (अज्ञात लेखक) तकल्लुम = वार्ताला...
Very true.
ReplyDeleteKeya baat ji
ReplyDeleteVery true ji mahapurso ji🙏🙏💐💐
ReplyDeleteDhandvat Dhan nirankar ji ji uncle ji 🙏
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