भगवान से अक़्ल नहीं, विद्वता नहीं -
नसीब माँगो, कृपा मांगो .......
क्योंकि मैंने हमेशा विद्वानों को भाग्यवानो के लिए काम करते देखा है
दिमाग़ वालों को नसीब वालों की नौकरी करते ही देखा है
ये अहंकार या घमंड नहीं - आत्मसम्मान का सवाल है अगर कोई अपना लहजा बदल ले - तो हम भी अपना रास्ता बदल सकते हैं !! This isn't about pride...
Waaoo......ur words always work for me.just like medicine ��....bless me...
ReplyDeleteGaurav Bhagat