भगवान से अक़्ल नहीं, विद्वता नहीं -
नसीब माँगो, कृपा मांगो .......
क्योंकि मैंने हमेशा विद्वानों को भाग्यवानो के लिए काम करते देखा है
दिमाग़ वालों को नसीब वालों की नौकरी करते ही देखा है
अमीर ने जो पकड़ी है कितनी ख़ूबसूरत लकड़ी है पर उस पर जो नक़्क़ाशी है वो इक ग़रीब ने तराशी है अमीर के लिए ये सोटी है पर ग़रीब की ये रोटी है ...
Waaoo......ur words always work for me.just like medicine ��....bless me...
ReplyDeleteGaurav Bhagat