भगवान से अक़्ल नहीं, विद्वता नहीं -
नसीब माँगो, कृपा मांगो .......
क्योंकि मैंने हमेशा विद्वानों को भाग्यवानो के लिए काम करते देखा है
दिमाग़ वालों को नसीब वालों की नौकरी करते ही देखा है
जो आंसू फैल के दरिया हुआ है वो मेरी आँख से टपका हुआ है लिखा न था मुकद्दर में जो मेरे वो दाना दांत में अटका हुआ है (लेखक अज्...
Waaoo......ur words always work for me.just like medicine ��....bless me...
ReplyDeleteGaurav Bhagat