अहंकार से सावधान रहें -
यह दोधारी तलवार है
बाहरी धार आपकी लोकप्रियता पर प्रहार करती है
और अंदरुनी धार आपकी सत्यता और पवित्रता पर।
अंततः यह दोनों को ही, अगर समाप्त नहीं, तो कम तो कर ही देती है।
Aangan ki yeh khwahish hai ki rim jhim ki ho barsaat Aur chhat ka taqaazaa hai ki ik boond na barsay ...
Bahut hee Uttam aur shikhshadayak bachan ji.🙏
ReplyDeleteVery True🙏🙏
ReplyDelete🙏
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