अहंकार से सावधान रहें -
यह दोधारी तलवार है
बाहरी धार आपकी लोकप्रियता पर प्रहार करती है
और अंदरुनी धार आपकी सत्यता और पवित्रता पर।
अंततः यह दोनों को ही, अगर समाप्त नहीं, तो कम तो कर ही देती है।
सुख़नवरी में बस इतना कमाल वाजिब हो अधूरी बात में पूरा ख़्याल वाजिब हो ख़ुदा करे कि मैं उस ज़ावीऐ से देख सकूं जहां से आपके अंदर का हाल वाजिब ह...
Bahut hee Uttam aur shikhshadayak bachan ji.🙏
ReplyDeleteVery True🙏🙏
ReplyDelete🙏
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