अहंकार से सावधान रहें -
यह दोधारी तलवार है
बाहरी धार आपकी लोकप्रियता पर प्रहार करती है
और अंदरुनी धार आपकी सत्यता और पवित्रता पर।
अंततः यह दोनों को ही, अगर समाप्त नहीं, तो कम तो कर ही देती है।
रौशनी कभी शोर नहीं मचाती कि वह दुनिया को रौशन कर सकती है, न ही वह अंधेरे से बहस करती है। वो तो बस चमकती है और अपने आस-पास की हर चीज़ को रौश...
Bahut hee Uttam aur shikhshadayak bachan ji.🙏
ReplyDeleteVery True🙏🙏
ReplyDelete🙏
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