अहंकार से सावधान रहें -
यह दोधारी तलवार है
बाहरी धार आपकी लोकप्रियता पर प्रहार करती है
और अंदरुनी धार आपकी सत्यता और पवित्रता पर।
अंततः यह दोनों को ही, अगर समाप्त नहीं, तो कम तो कर ही देती है।
जब नाव जल में छोड़ दी तूफ़ान में ही मोड़ दी दे दी चुनौती सिंधु को फिर धार क्या मझधार क्या कह मृत्यु को वरदान ही मरना लिया जब ठान ही फिर जीत ...
Bahut hee Uttam aur shikhshadayak bachan ji.🙏
ReplyDeleteVery True🙏🙏
ReplyDelete🙏
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