तो अकेले चलिए - जैसे हाथी जंगल में अकेला ही घूमता है
जो आपकी प्रगति में बाधा डालें उन लोगों के साथ चलने की बजाय
अकेले रहना ही बेहतर है
कबीर एह तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास एह तन जलता देख के भयो कबीर...
No comments:
Post a Comment