Thursday, April 11, 2019

ये सबके बस की बात नहीं

स्वर सागर में डूब के गाना सबके बस की बात नहीं
श्रोता के मन को छू पाना सबके बस की बात नहीं

जोड़ जोड़ के शब्दों को भाषण तो सब दे लेते हैं
वाणी से अमृत बरसाना सबके बस की बात नहीं

भाव हृदय में होते हैं लेकिन शब्दों को चुन चुन कर
गीत रुप में भाव सजाना सबके बस की बात नहीं

फूलों से घर को महकाना सबको अच्छा लगता है
जीवन की बगिया महकाना सबके बस की बात नहीं

ज्ञान की बातें पढ़ सुन के दोहरा सकता है हर कोई 

जीवन में  उनको अपनाना सबके बस की बात नहीं

देख के माया रंग बिरंगी सबका मन ललचाता है
जीवन में संयम ले आना सबके बस की बात नहीं

बदल जाए जब परिस्थिति तो मन में उलझन होती है
समय के साँचे में ढ़ल जाना सबके बस की बात नहीं

कथाकार तो मिल जाएंगे इक से इक अच्छे लेकिन
भूले को मार्ग दिखलाना सबके बस की बात नहीं

कहना तो आसान है जग में हर प्राणी से प्रेम करो 
प्रेम से सबको कंठ लगाना सब के बस की बात नहीं 

बात - बात में दुखती रग पे उंगली सब रख देते हैं
दुखते घावों को सहलाना सबके बस की बात नहीं

क्या टूटा है अंदर अंदर - कोई ये कैसे समझाए
मन के घावों को दर्शाना सबके बस की बात नहीं

कठिन नहीं शक्ति के बल पर बात अपनी मनवा लेना
सब के हृदय में बस जाना सबके बस की बात नहीं

कहते हैं कुछ लोग कि जीवन तो इक गोरखधंधा है
जीवन की गुत्थी सुलझाना सबके बस की बात नहीं

कुछ बातें जीवन में  अनुभव से ही सीखी जाती हैं
उन को शब्दों में समझाना सबके बस की बात नहीं

सुख में साथी बन जाते हैं - मित्र, सम्बन्धी, सहकर्मी
दुःख में 'राजन' साथ निभाना सबके बस की बात नहीं
                               ' राजन सचदेव  '

3 comments:

  1. Very beautifully explained in simple words.

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  2. Very Beautifully written.
    J.K

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  3. Excellent poetry. Very touching
    P.K.

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