Wednesday, November 8, 2017

पैदा कर कुछ अपने आप में हुनर

जैसे कोई काग़ज़ का टुकड़ा अधजला
या पेड़ से पत्ता कोई गिरता हुआ 
नाचता फिरे ख़ुदी से बेख़बर 
तेज़ हवा के कंधे पर उड़ता हुआ 

लेकिन कुछ ही देर में ज़मीन पर   
गिरता है मिट्टी में थिरकता हुआ 
सोचो, कब तलक करेगा मौज कोई  
दूसरों के बल पे चहकता हुआ 

पैदा करे जो अपने क़ल्ब में हुनर 
सदाक़तों की राह पे चलता हुआ 
रखे न औरों से तवक्को कोई 
फिर भी सबकोआशना रखता हुआ 

फूलों की मानिंद महकता हुआ  
ख़ुशबुओं की तरह बिखरता हुआ 
मंज़िलों का सफ़र तय करता रहे 
दिल में अपने हौसला रखता हुआ

मैं भी मुसाफ़िर हूँ  एक मुद्दत से 
आया इन्हीं राहों से गुज़रता हुआ 
देखे हैं इन राहों पे राही कई 
देखा सूरज चढ़ताऔर ढलता हुआ 

राहे हक़ का सफ़र गो आसाँ नहीं 
पा लेगा मंज़िल बशर चलता हुआ 
शौके मंज़िल है तो रुकना है हराम
है मुबारक हर क़दम बढ़ता हुआ 

सोच न कि मंज़िल कितनी दूर है 
बढ़ता चलआगे क़दम धरता हुआ  
रास्ता वही है - मंज़िल भी वही 
वक़्त बस रहता है बदलता हुआ 

'राजन ' राहे -हक़ का मुसाफ़िर है तू 
रहता है हर वक़्त क्यों डरता हुआ 
रफ़्ता रफ़्ता चलता रह बा -हौसला 
अना की रहगुज़र से पर बचता हुआ 
                'राजन सचदेव '


क़ल्ब   -----      दिल,  ज़ात   Personality 
तवक्को  ------ उम्मीद    Expectations 
आशना   ------- प्रेम    Friendship 
राहे -हक़    ----- सच्चाई का मार्ग    Path of truth 
रफ़्ता रफ़्ता  -----   धीरे धीरे, आहिस्ता आहिस्ता   Slowly 
अना  -----------  अभिमान    Pride, Ego      

4 comments:

  1. Awesome ... I remember one line similar on this,
    Saayan hain kam khajur ke unche darakht ka, umeed naa baandhiye badein aadmi se. 😊🙏 Dnj

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  2. बहुत ख़ूब !👏🏼👏🏼👏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

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