तुम प्यार की सौगात लिए घर से तो निकलाे
रस्ते में तुम्हें कोई भी दुश्मन न मिलेगा
'अनवर जलालपुरी'
Tum pyaar ki saugaat liye ghar say to nikalo
Rastay me tumhen koi bhi dushman na milega
'Anwar Jalaalpuri'
कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...
Nice thought ji.....it's true....Dhan Nirankar ji
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