Thursday, January 25, 2018

सब को ये ग़ुमां है कि हम Sab ko ye guman hai ki hum

सब को ये ग़ुमां है  कि हम भी हैं कोई चीज़  
मुझको है ये नाज़  कि मैं कुछ भी नहीं हूँ 

Sab ko ye guman hai ki hum bhi hain koi cheez 
Mujhko hai ye naaz ki main kuchh bhi nahin hoon 


1 comment:

कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...