Wednesday, May 10, 2017

देखा तुझे तो ऐसा लगा --

देखा तुझे तो ऐसा लगा  कि मैं भी तेरे जैसा हूँ 
फ़र्क़ सिरफ़ इतना ही है तू सागर है मैं क़तरा हूँ 

तू है अनादि अनंत है तू - मैं दो पल का किस्सा हूँ 
कुल है तू मैं जुज़ ही सही पर आख़िर तेरा हिस्सा हूँ 

तू हर शै में ज़ाहिर है  मैं अपनी अना में पिनहा हूँ 
तू हरदम है साथ मेरे पर फिर भी क्यों मैं तनहा हूँ 

 कैसा अजब है खेल ये 'राजन ' देख देख मैं हँसता हूँ 
  तू रहता है मेरे अंदर - मैं तेरे अंदर रहता हूँ 

                           'राजन सचदेव '


सागर          Ocean  (from Hindi - not Persian)
क़तरा          Drop
अनादि        Without beginning
अनंत          Without end
कुल            whole , Complete
जुज़            Part, partial (also without ... as separated)
हर शै में       in everything - object, matter or every being
ज़ाहिर         Obvious, Evident 
अना            Ego , Pride
पिनहा          Hidden
तनहा           Alone



4 comments:

  1. वाह राजन !🙏🏼🙏🏼🙏🏼👏🏼👏🏼👏🏼

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  2. 🙏🏼🙏🏼🙏🏼👍🏽👍🏽👍🏽

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  3. Tremendous poem ....it's really touch our heart

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Nice Comment on post "Anger A Zen Story "

New Comment on post " Anger .... A Zen Buddhist Story ": Good story with many lessons and the "anger was within him" is...