जनाज़े को उनके वो रुकवा के बोले
ये लौटेंगे कब तक - कहां जा रहे हैं ?
जवाब मिला
आए थे दुनिया में दिन चार लेकर
जहां से चले थे - वहां जा रहे हैं
कबीर गर्व न कीजिए देही देख सौरंग आज काल तज जावना ज्यों काचुरी भुजंग । कबीर गर्व न कीजिए ऊँचा देख आवास आज काल भोएं लेटना ऊपर जमेगा घास । कब...
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