Saturday, June 3, 2023

अन्धं तमः प्रविशन्ति - अंधकार में

             अन्धं तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते।
             ततो भूय इव ते तमो य उ विद्यायां रताः॥
                              ( ईशोपनिषद्  9)
                        अन्वय 
          ये अविद्याम् उपासते ते अन्धं तमः प्रविशन्ति। 
          ये उ विद्यायां रताः ते भूयः तमः इव प्रविशन्ति ॥
अर्थात :
जो अविद्या का - अज्ञान का अनुसरण करते हैं - गहन अंधकार में वह प्रवेश करते हैं ।
और जो केवल विद्या में ही रत रहते हैं - 
जो केवल ग्रंथों एवं शास्त्रों को पढ़ने पढ़ाने में ही अपना जीवन समर्पित कर देते हैं - 
वे उस से भी अधिक गहन अंधकार में हैं। 

अज्ञान का अनुसरण करने का अर्थ है बिना सोचे समझे - बिना अच्छी तरह जाने बूझे 
अनजाने में ही कर्मकांड का पालन करते रहना। 
ज्ञान को - सत्य को पूर्ण रुप से समझे बिना केवल औपचारिक रुप से कर्मकांड - नियमों और संस्कारों का पालन करते रहने से - 
और मात्र औपचारिक रुप से सत्संग एवं भक्ति इत्यादि करते रहने से ही जीवन प्रकाशमय नहीं हो जाता।  
मन में अंधकार बना ही रहता है।  

और दूसरी ओर - जो लोग केवल पढ़ने पढ़ाने और सिर्फ ज्ञान की बातें करने में ही व्यस्त रहते हैं - 
जो न तो स्वयं ज्ञान को पूरी तरह से समझते हैं और न ही अपने अंदर ज्ञान का अनुभव कर पाते हैं - 
ऐसे लोग अज्ञान का अनुसरण करने वालों से भी अधिक गहन अन्धकार में हैं।  

क्योंकि वह सत्य - जो व्यावहारिक नहीं है - जिसे अनुभव न किया गया हो - 
जिसे रोज़मर्रा के जीवन में अपनाया न गया हो  - उसका कोई लाभ नहीं । 
वह किसी के लिए भी अच्छा नहीं है।
हम दिन भर ज्ञान का उपदेश कर सकते हैं -  उच्च आदर्शों की बातें कर सकते हैं 
लेकिन जो विचारधारा और सिद्धांत व्यावहारिक नहीं हैं -
और जो अंतःकरण में नहीं समाए - जो जीवन का अंग नहीं बने - वो कभी फलदायी नहीं हो सकते। 

जैसा कि श्री शुकदेव मुनि ने भागवत पुराण में कहा है:
               श्रवणम - मननम - स्मरणम
पहले सुनें  - ज्ञान प्राप्त करें 
फिर मनन - जो ज्ञान मिला है उसका विश्लेषण करें - उसे ठीक से  समझें 
और फिर स्मरण -  ज्ञान को हमेशा याद रखें  अर्थात अन्तःकरण में अनुभव करें और उसे जीवन में ढालें।
                                                    ' राजन सचदेव '

3 comments:

  1. Very true. This kind of behavior and rituals are very prevalent in today’s “religious” world

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  2. Very beautiful and insightful!!

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  3. Absolutely True 🙏🏻🙏🏻

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