वक़्त मौसम की तरह होता है
समय अच्छा हो या बुरा - दोनों गुज़र जाते हैं
न केवल गुजर जाते हैं -
बल्कि ऋतुओं की तरह -
मौसम की तरह बार बार आते जाते रहते हैं
जो यह जान लेता है - इस तथ्य को समझ लेता है -
वह व्यग्र - बेचैन और व्याकुल नहीं होता।
रौशनी कभी शोर नहीं मचाती कि वह दुनिया को रौशन कर सकती है, न ही वह अंधेरे से बहस करती है। वो तो बस चमकती है और अपने आस-पास की हर चीज़ को रौश...
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