Thursday, December 16, 2021

हमारे पाँव का काँटा

           न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा
           हमारे पाँव का काँटा - हमीं से निकलेगा
                                                         (अज्ञात)

इस शेर में पाँव शब्द का उपयोग एक रुपक अथवा अलंकार के रुप में किया गया है।
यहाँ शायर ये कहना चाहता है कि कोई दूसरा इंसान -चाहे वो हमारा कितना भी हितैषी क्यों न हो - कोई जादू की छड़ी हिला कर हमारे मन से कांटों अर्थात बुराइयों को दूर नहीं कर सकता।
वो हमें स्वयं ही दूर करनी होंगी 
और उन्हें अच्छे, नेक और शुभ विचारों से बदलना होगा।

गुरुजन, संतजन, नेक और सज्जन लोग एवं शास्त्र हमें प्रेरणा दे सकते हैं - हमें रास्ता दिखा सकते हैं
लेकिन चलना तो हमें स्वयं ही पड़ेगा 

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अमीर ने जो पकड़ी है The stick a rich man holds

अमीर ने जो पकड़ी है  कितनी ख़ूबसूरत लकड़ी है  पर उस पर जो नक़्क़ाशी है  वो इक ग़रीब ने तराशी है  अमीर के लिए ये सोटी है  पर ग़रीब की ये रोटी है    ...