Thursday, March 24, 2016

आईना

दाग़ चेहरे पर लगे थे और हम 
आईना ही साफ़ करते रह गए 
 ~ ~~~~  ~ ~~~~ ~ ~~~~  

आईना जब भी उठाया करो ....... 

किसी और को दिखाने से पहले 
खुद को देखा करो ........
फिर किसी और को दिखाया करो 
 ~ ~~~~ ~ ~~~~   ~ ~~~~ ~ ~ 

जब किसी पे कभी तब्सरा कीजिये 

अपने सामने भी आईना रख लीजिये 
 ~ ~~~~    ~ ~~~~   ~ ~~~~  ~ ~~ 


No comments:

Post a Comment

मृत्यु से मोक्ष तक — From Death to Liberation

इच्छा के रहते प्राण चले जाएं तो वह मृत्यु अर्थात कालचक्र अथवा आवागमन की क्रिया का एक अंग है।  और अगर प्राण के रहते इच्छाएं चली जाए तो वह मुक...