Monday, January 19, 2026

विवेक उधार में नहीं मिलता

विवेक बुद्धि उधार में नहीं मिलती। 
जो लिया जा सकता है — वह विवेक नहीं — केवल ज्ञान होता है।
सिर्फ़ शिक्षा होती है। 

ज्ञान का आदान-प्रदान हो सकता है 
शिक्षा हस्तांतरित की जा सकती है—
ग्रहण की जा सकती है, प्रसारित की जा सकती है, उसकी पुनरावृत्त की जा सकती है।
उसे सीखा जा सकता है - सिखाया जा सकता है - दोहराया जा सकता है।
लेकिन विवेक बुद्धि तो अनुभव और मनन से जन्म लेती है 
और आत्मचिंतन द्वारा आत्मसात होती है।
उसे कोई दूसरा प्रदान नहीं कर सकता। 
        " राजन सचदेव " 

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...