Sunday, January 18, 2026

शेर और बकरी एक घाट पर?

                                                           1 

एक ऐतिहासिक कहानी के अनुसार -  प्राचीन समय में डोगरा वंश के राजा जम्बू लोचन एक बार शिकार करने निकले। 
तवी नदी को पार करने पर उन्होंने एक असाधारण और अविश्वसनीय दृश्य देखा। 
तवी के किनारे पर एक शेर और एक हिरण शांति से - बिना किसी प्रतिक्रिया अथवा भय से एक साथ पानी पी रहे थे। 
हैरान होकर राजा जम्बू लोचन ने अपने भाई बाहु को बुलाया और कहा - 
“यह चमत्कार देखो। 
ये शेर और हिरण एक ही घाट पर एक साथ पानी पी रहे हैं ।
न तो शेर हिरण को डराने की कोशिश कर रहा है और न ही हिरण शेर से डर रहा है। "

इस दृश्य को देख कर राजा जम्बू लोचन को लगा कि यहां की धरती बहुत नेक और शांतिपूर्ण है।  
ऐसा सोच कर राजा ने उस स्थान पर एक ऐसा नगर बसाने का निश्चय किया जहां सभी प्रकार के लोग शांतिपूर्वक ढंग से इकट्ठे मिल कर रह सकें।  
नौवीं शताब्दी में राजा जम्बू लोचन ने तवी नदी के पार अपने नाम पर जम्बूपुरा अथवा जम्बू नगर की स्थापना की जो कालांतर में जम्मू कहलाने लगा। 
तवी नदी के दूसरे किनारे पर बना हुआ प्रसिद्ध बाहू किला राजा जम्बू लोचन के भाई बाहू के नाम पर निर्मित है। 
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                                                   दूसरा प्रकरण अथवा परिदृश्य 

उपरोक्त ऐतिहासिक कहानी का एक अन्य रुप भी मिलता है। 
एक अन्य धारणा के अनुसार :
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हैरान होकर राजा जम्बू लोचन ने अपने भाई बाहु को बुलाया और कहा 
“यह चमत्कार देखो। 
ये शेर और हिरण एक ही घाट पर एक साथ पानी पी रहे हैं 
दोनों ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे प्राकृतिक नियम इनके लिए कोई मायने नहीं रखते। 
न तो शेर हिरण को डराने की कोशिश कर रहा है और न ही हिरण शेर से डर रहा है।"

राजा ने एक आह भरी और थोड़ी देर सोचने के बाद कहा -
“यह सद्भाव नहीं है; यह अव्यवस्था है।
शेर अपनी ताकत भूल गया है, और हिरण अपनी सहज प्रवृत्ति भूल गया है।
जब इस देश के जानवर भी प्रकृति के नियम का उल्लंघन कर रहे हैं, तो इस देश के लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है?”
फिर राजा जम्बू लोचन ने निष्कर्ष निकाला :
“अगर यहाँ एक शेर अपना प्रभाव नहीं दिखा सकता - अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर के अपने अधिकार को साबित नहीं कर सकता। 
और हिरण के मन में शेर के लिए कोई भी सम्मान और भय नहीं है, तो इस देश में रहने वाले लोगों में भी अपने बड़ों के लिए कोई सम्मान नहीं होगा। 
उनके  ह्रदय में न तो नेतृत्व के लिए कोई सम्मान होगा, और न ही कानून के लिए। 
उनके मन में व्यवस्था के प्रति कोई आस्था नहीं होगी - उनकी नैतिक विचारधारा भी भ्रमित हो चुकी होगी।
जिस देश में प्रकृति के नियमों को नज़रअंदाज़ किया जाता हो, उन का उल्लंघन किया जाता हो उस देश के लोगों पर शासन करना बहुत आसान होता है। 
जो लोग अपने अधिकार को पहचान कर उसका सही ढंग से उपयोग नहीं कर सकते वह अपने देश, अपने लोगों का कोई भला नहीं कर सकते। 
और जो अपने नेताओं का सम्मान नहीं कर सकते, वे अपनी आज़ादी और अधिकारों की रक्षा भी नहीं कर सकते।
ऐसे लोगों पर बिना किसी विरोध और प्रतिरोध के शासन किया जा सकता है।”

राजा जम्बू लोचन के लिए शेर और हिरण का एक साथ पानी पीना शांति का प्रतीक नहीं था, बल्कि एक चेतावनी थी - कि जब सम्मान, पदानुक्रम अथवा पद श्रृंखला (Chain of command) और प्राकृतिक संतुलन समाप्त हो जाते हैं, तो समाज स्वयंमेव ही पतन की ओर अग्रसर होने लगता है।

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