एक मैं ही समझदार हूँ बाकी सब नादान
इसी वहम में घूम रहा है देखो हर इंसान
Ek main hee samajh-daar hoon baaki sub nadaan
Isi veham me ghoom rahaa hai dekho har insaan
सुख़नवरी में बस इतना कमाल वाजिब हो अधूरी बात में पूरा ख़्याल वाजिब हो ख़ुदा करे कि मैं उस ज़ावीऐ से देख सकूं जहां से आपके अंदर का हाल वाजिब ह...
No comments:
Post a Comment