Sunday, July 22, 2018

हम सब कुछ बदल लेते हैं .......

हम घर बदल लेते हैं  
                लिबास बदल लेते हैं  
दोस्त बदल लेते हैं 
               रिश्ते बदल लेते हैं 
काम बदल लेते हैं 
             गुरु भी बदल लेते हैं 
लेकिन फिर भी परेशान रहते हैं 
              क्यों ?
क्योंकि हम स्वयं को नहीं बदलते 

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कबीर एह तन जाएगा Body is destined to perish

कबीर एह  तन जाएगा सकहु ता लेहु बहोरि  नागे पाओं ते गए जिन के लाख करोरि  हाड़ जले ज्यों लाकड़ी - केस जले ज्यों घास  एह  तन जलता देख के भयो कबीर...