Sunday, June 18, 2017

नाम-धन या नाम और धन

आज का मानव नाम-धन को छोड़ कर नाम और धन के  पीछे  भाग रहा है
निरंकरी मिशन में भी युग पुरुष पूज्यनीय बाबा अवतार सिंह जी महाराज के समय
धर्म ग्रंथों के अध्यन, जिज्ञासा और फिर खोज के बाद ज्ञान मिलता था - जिसका मूल्य 
समझ कर दिल से समर्पण और भक्ति की जाती थी
आज के समय में बिना अध्यन और बिना खोज किए आसानी से ज्ञान मिल जाता है 
इसलिए ज्यादातर भक्ति दिमाग से हो रही है और जब दिमाग से भक्ति होती है तो 
तर्क बीच में आ जाता है और श्रद्धा कम हो जाती है

                                      ' गुरुप्रकाश चुघ ' (गाँधी नगर )
                                         
                                         

2 comments:

  1. Well said. A lot of truth to this blog.

    ReplyDelete
  2. Its true....may nirankar bless us for true devotion from pure heart....

    ReplyDelete

​हाथ ​तो उसके भी दुखे होंगे Haath to us kay be dukhay hongay​

​हाथ ​तो उसके  भी  दुखे  होंगे ज़रूर  ​जिसने मेरी राह में काँटे बिछाए होंगे ​ Haath to uskay be dukhay hongay​ zaroor  Jisne meri ...