Monday, November 23, 2015

तजुर्बा कच्चा ही रह गया

ज़िन्दगी  की दौड़ में .....
तजुर्बा कच्चा ही रह गया
हम सीख न पाये 'फ़रेब '
और दिल बच्चा ही रह गया ! 

बचपन में …… 
जब, जहाँ चाहा, हंस लेते थे
जब, जहाँ चाहा, रो लेते थे
पर अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए
और आंसुओ को तन्हाई !

                  By:  Unknown Author

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