इच्छा के रहते प्राण चले जाएं तो वह मृत्यु अर्थात कालचक्र अथवा आवागमन की क्रिया का एक अंग है।
और अगर प्राण के रहते इच्छाएं चली जाए तो वह मुक्ति है।
If life departs while desires remain, that is death, which is a part of the Kaal Chakra - the wheel of time, or the cycle of birth and rebirth.
But if desires vanish while life remains, that is Moksha - the true liberation.
" Rajan Sachdeva "
🙏💕 क्या यह सम्भव है ?
ReplyDeleteअत्यंत कठिन तो है लेकिन बहुत हद तक संभव है
Deleteअत्यंत कठिन तो है लेकिन बहुत हद तक संभव है
Deleteभगवद गीता के अनुसार;
असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते
(श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 6 श्लोक 35)
अर्थात हे महाबाहु अर्जुन! इसमें कोई संदेह नहीं है कि चंचल मन को वश में करना बहुत कठिन है।
लेकिन हे कुंती पुत्र! निरंतर अभ्यास और वैराग्य द्वारा मन को नियंत्रित किया जा सकता है।
Yes Very difficult but possible 🙏
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