भगवान गणेश को सौभाग्य का देवता और विघ्नहर्ता अर्थात बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है।
हिन्दू अथवा सनातन देवी देवताओं के चित्र एवं कथाएं प्रतीकात्मक होते हैं।
इन चित्रों को उनकी वास्तविक छवि मान लेने के कारण ही पश्चिमी प्रभाव के अंतर्गत पढ़े-लिखे शिक्षित लोग तथा गैर-हिन्दू इन्हें शंकित दृष्टिकोण से देखते हैं और अत्यंत हास्यास्पद मान कर इनकी आलोचना करने लगते हैं।
वास्तव में इन प्रतीकों के पीछे कई गहरे अर्थ छुपे होते हैं।
चेहरा, रंग, एवं भाव-भंगिमा तथा अन्य चिन्ह विशेष और गहरा महत्व रखती हैं।
यहां तक कि उनके आस-पास की वस्तुओं का भी बहुत महत्व होता है।
देवी देवताओं की इन अजीब लगने वाली तस्वीरों में छिपे प्रतीकों पर ध्यान से और गंभीरता से विचार करके, हम उनके पीछे छिपे गहरे अर्थ को समझ सकते हैं।
गणेश (गण+ईश) और गणपति (गण+पति) का शाब्दिक अर्थ है जनता का स्वामी अथवा शासक और जन-नायक अर्थात नेता।
अन्य हिंदू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की तरह, गणेश की प्रतिमा अथवा चित्र भी प्रतीकात्मक है।
गणेश जी के प्रतीक भौतिक और आध्यात्मिक - दोनों में ही गहरा अर्थ रखते हैं।
भौतिक संसार में गणपति के प्रतीक
गणेश = गण+ईश का मतलब है जनगण अथवा लोगों के समूह अथवा जनता का स्वामी एवं शासक।
भौतिक संसार में गणपति के प्रतीक एक महान नेता के गुणों को दर्शाते हैं, जो समाज के कल्याण और साधारण जनता को भौतिक और सूक्ष्म बाधाओं से बचाने से संबंधित हैं।
इन गुणों को सभी राजनीतिक, सामाजिक या आध्यात्मिक नेताओं पर लागू किया जा सकता है - बल्कि किया ही जाना चाहिए ताकि वे अपने लोगों और अनुयायियों का कुशलतापूर्वक नेतृत्व कर सकें।
हाथी, जो भारत का मूल जानवर है, शक्ति का प्रतीक है। ये बहुत ही मिलनसार और रक्षा करने वाला है।
चूंकि गणेश - अर्थात शासक या नेता - सुरक्षा और शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उन्हें हाथी के सिर के साथ दिखाया जाता है जो यह बताता है कि एक अच्छे नेता को अपने अनुयायियों का नेतृत्व करने के लिए हाथी की तरह शक्ति सम्पन्न और आत्मविश्वासी होना चाहिए।
उनका अनुपात से बड़ा सिर उनकी बुद्धिमत्ता और लीक से हटकर सोचने की क्षमता का प्रतीक है।
छोटा मुँह और बड़े कान ये समझाते हैं कि वे कम बोलें और अधिक सुनें -अर्थात अपनी बात मनवाने की बजाए ज़रुरतमंद लोगों की बात सुन कर उनकी परेशानियां दूर करने का यत्न करना चाहिए।
छोटी आँखों का अर्थ है कि उन्हें अपने अनुयायियों एवं जनसधारण की कमियों और गलतियों को नज़रअंदाज़ करते हुए हमेशा उनका मार्गदर्शन और नेतृत्व करते रहना चाहिए।
उनका एक दाँत केवल एक उद्देश्य के लिए काम करने का प्रतीक है - अर्थात दूसरों का कल्याण।
बड़ा पेट यह दिखाता है कि एक अच्छा नेता दूसरों की गलतियों और रहस्यों को अपने अंदर रख सकता है। यह दिखाता है कि वह दूसरों द्वारा किए गए सभी अच्छे और बुरे कामों को पचा सकता है। वह न तो सार्वजनिक रुप से किसी की बुराई करता है और न ही उनका बुरा करने का प्रयास करता है।
लंबी और लचीली सूंड
जैसे हाथी अपनी लंबी और लचीली सूंड से भोजन एकत्रित करता है, वैसे ही एक अच्छे लीडर को दूरदर्शिता और लचीले नज़रिए से बड़े बड़े और लाभदायक संसाधन खोजने में सक्षम होना चाहिए।
गणेश के चार हाथ एक साथ कई काम करने (Multi-tasking) का प्रतीक हैं।
वह हर एक हाथ में अलग-अलग चीज़ें पकड़े हुए हैं। जो ये बताती हैं कि एक अच्छा लीडर अपने अनुयायिओं को जीवन में आगे बढ़ने और तरक्की करने में किस तरह मदद कर सकता है।
वो एक हाथ में रस्सी पकड़े हुए हैं, जो लीडर की उस काबिलियत को दिखाती है जिससे वे सभी को गरीबी और दुख से निकालकर बेहतर और खुशहाल ज़िंदगी की ओर ले जा सकते हैं।
उनके दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी है, जो समाज में गलत सोच और परंपराओं को समाप्त करने का प्रतीक है।
तीसरे हाथ में वे मिठाइयों से भरा कटोरा पकड़े हुए हैं, जो लोगों के लिए अच्छे, मीठे और सही परिणाम लाने का संकल्प है। ताकि जनसाधारण को उसके कामों का मीठा फल मिल सके।
चौथा हाथ आशीर्वाद देने की मुद्रा में है, जो सुरक्षा और बचाव का भरोसा दिलाता है।
गणपति चूहे की सवारी करते हैं:
गणपति के पैर के नीचे एक चूहा दिखाया गया है।
चूहा खाद्य पदार्थ और अन्य बहुमूल्य चीज़ें चुराकर अपने बिल में इकट्ठा करता रहता है।
यह आपके ही घर में रहता है, चोरी करता है और मूलयवान वस्तुएं अपनी छिपने की जगह पर जमा करता रहता है।
गणेश, गणपति या एक अच्छा लीडर ऐसे लोगों को अपने नीचे अर्थात नियंत्रण में रखता है और उन्हें कुछ भी चुराने नहीं देता।
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व्यक्तिगत एवं आध्यात्मिक प्रतीक
आध्यात्मिक संदर्भ में, मन अथवा चेतना को इंद्रियों (पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ और पाँच कर्मेन्द्रियाँ) का स्वामी माना जाता है।
गणेश के अलग-अलग अंग और उनके आस-पास की चीज़ें सत्य की खोज करने वाले जिज्ञासुओं के लिए गहरे प्रतीकात्मक सन्देश हैं।
हाथी एक विशालकाय जीव है।
कुत्ते अक़्सर भौंक कर अपनी उपस्थिति का एहसास दिलाते रहते हैं। लेकिन हाथी चलते हुए कभी शोर नहीं करता। वह अपनी मस्त चाल में चलता रहता है। उसकी विशालता ही उसकी उपस्थिति का प्रकटाव है।
इसी तरह आध्यात्मिक व्यक्ति भी अपनी योग्यता एवं गुणों का शोर नहीं करता। उसके हृदय और स्वभाव की विशालता ही उसे प्रकट करती है।
बड़ा सिर अथवा विशाल मस्तक बुद्धिमता एवं विवेक अर्थात असीम ज्ञान और विचार-शक्ति का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक व्यक्ति की सोचने विचारने की विशाल क्षमता को दर्शाता है।
छोटा मुँह और बड़े कान
वाक (बोलने) और श्रवण (सुनने) की अवधारणाओं को दर्शाते हैं।
वे बताते हैं कि ज्ञानी या साधक कम बोलता है। वह अधिकतर मौन रहता है और विद्वानों एवं ज्ञानियों द्वारा दी जाने वाली शिक्षाओं को ज़्यादा सुनता है।
उनकी छोटी आँखें एकाग्रता और एक ही लक्ष्य पर पूर्ण रुप से ध्यान लगाने का संकेत देती हैं। उन्हें दूसरों की कमियाँ देखने की बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का संकेत देती हैं। वह हर बात पर उद्वेलित हो कर प्रतिक्रिया नहीं करते। वह न तो किसी की बुराई करता है और न ही उनका बुरा करने का प्रयास करता है।
एक दंत :
वह केवल शुभ एवं सकारात्मक विचारों को ग्रहण करते हैं।
बड़े पेट का अर्थ है पचाने की क्षमता।
जीवन सुख और दुख का मिश्रण है।
ज्ञानी व्यक्ति जीवन की हर अच्छी और बुरी परिस्थिति को शांति से संभाल और पचा सकता है।
गणेश जी के चार हाथ
एक सुदृढ़ मन हर तरह से इंद्रियों पर नियंत्रण करके आध्यात्मिकता के मार्ग पर आगे बढ़ता रहता है।
एक हाथ में वे रस्सी पकड़े हुए हैं, जो स्वयं को हर प्रकार की नकारात्मकता से ऊपर उठकर आत्म-ज्ञान और मुक्ति के परम लक्ष्य की ओर ले जाने की क्षमता को दिखाती है।
दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी है - जो नश्वर संसार के मोह-माया के बंधन को काटने का प्रतीक है।
तीसरे हाथ में वे मिठाइयों से भरा कटोरा पकड़े हुए हैं- अर्थात उन्हें मीठा पसंद है। जिसका अर्थ है कि वे केवल मिठास - यानी अच्छाई और सकारात्मकता को ही अपनाते हैं और बनाए रखते हैं जो आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यावश्यक है। वो शुभ लेते हैं और शुभ ही बांटते हैं।
उनका चौथा हाथ आशीर्वाद देने वाली मुद्रा में दिखाया जाता है, जो अभय का प्रतीक है।
ज्ञानी व्यक्ति गलत धारणाओं, विचारों और आडंबरों के भय से मुक्त होता है। वह अपनी आध्यात्मिक यात्रा भय के कारण नहीं करता। उसके मन में केवल सत्य जानने की जिज्ञासा होती है। वह गलत धारणाओं से न तो स्वयं डरता है और न ही दूसरों के मन में गलत धारणाओं का डर पैदा करके उन्हें डराता है।
पाँव के नीचे चूहा
चूहा चंचलता और लोभ का प्रतीक है।
मनुष्य की भी स्वाभाविक प्रवृत्ति है - चंचलता एवं लोभ।
गणेश अर्थात ज्ञानी मन, लोभ रुपी चूहे को अपने नीचे दबाकर अर्थात अपने नियंत्रण में रखते हैं।
वे ईमानदारी से अपनी आजीविका कमाते हैं। धोखाधड़ी से नहीं। और न ही किसी का धन अथवा हक़ छीनने की कोशिश करते हैं। वे सादगी और पवित्रता का जीवन जीते हैं।
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देवी देवताओं की ये अजीब सी लगने वाली प्रतिमाओं और तस्वीरों में छिपे प्रतीकों को समझकर हम आगे बढ़ने और आत्म-ज्ञान व मुक्ति पाने के सही तरीके सीख सकते हैं।
आइए: हम सब सच को देखने और समझने का प्रयत्न करें।
बिना सोचे-समझे धर्मग्रंथों और पुरातन परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करने अथवा उनका मज़ाक उड़ाने के बजाय उनके वास्तविक अर्थों को समझकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखें।
" राजन सचदेव "
प्रतीकों की अति सुन्दर व्याख्या !
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