एक मैं ही समझदार हूँ बाकी सब नादान
इसी भ्रम में घूम रहा है देखो हर इंसान
Ek main hee samajhdaar hoon baaki sub nadaan
Isi Bharam me ghoom rahaa hai dekho har insaan
सुमति कुमति सबके उर रहहीं। नाथ पुरान निगम अस कहहीं॥ जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥ ...
Hazoor baba ji aksar फरमाते थे ........मारा गया जिसने कहा मैं बड़ा।
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