एक सिसकता आंसुओं का कारवां रह जाएगा
प्यार की धरती अगर बंदूक से बांटी गई
एक मुर्दा शहर अपने दरमियां रह जाएगा
(पद्मभूषण गोपालदास सक्सेना "नीरज")
गूंगों को तकल्लुम के मवाक़े हैं मयस्सर और माहिर-ए-गुफ़्तार बड़ी देर से चुप हैं (अज्ञात लेखक) तकल्लुम = वार्ताला...
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