कौन जानता है कि वास्तव में कोई कैसा है
जैसी जिस की धारणा - उसके लिए वैसा है
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किसी की वास्तविकता को कौन जानता है?
कौन जानता है कि असल में कोई कैसा है?
हर व्यक्ति को हम अपनी-अपनी धारणा के अनुसार देखते और समझते हैं।
जैसी हमारी उनके प्रति धारणा है - वैसे ही वे हमें दिखाई देते हैं।
अक़्सर हम अपने मन में हर व्यक्ति की एक ख़ास छवि बना लेते हैं
और एक बार जो छवि हमारे मन में बन गयी -
वे हमें सदैव वैसे ही प्रतीत होते हैं।
" राजन सचदेव "
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Kaise bataoon main tumhe Mere liye tum kaun ho Kaise bataoon main tumhe Tum dhadkanon ka geet ho Jeevan ka tum sangeet ho Tum zindagi...
Absolutely true ji.🙏
ReplyDeleteमौलिक प्रश्न है राजन जी क्या सत्य भी धारणा मन पर ही निर्भर रहता है... तो क्या सत्य सार्वभौम रहते हुए भी व्यक्ति की धारणा पर ही रहता है। आप जी जरुर लिखिए इस विषय पर भी
ReplyDeleteVery true ji. 🙏
ReplyDeleteVery True 🙏🙏
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