मैंने पूछा - कल वो मेरे ख़्वाब में क्यों नहीं आए ?
वो बोले कल इतवार था -जज़बात के दफ्तर में छुट्टी थी
Mainay poochha- kal vo meray khwaab me kyon nahin aaye?
Vo bolay kal Sunday tha - Jazbaat kay office me chhutti thi
ये जाते हुए पुराने साल की नसीहत भी तुम हो और आने वाले हर इक साल की ज़रुरत भी तुम हो (तुम = निरंकार ईश्वर) कि जो तौफ़ीक़ रखते हैं बना लें...
Haha..... Maza aaya jee 🌹
ReplyDeleteWah Ji wah Uncle Ji
ReplyDeleteThere's holiday!!
😄👍
ReplyDeleteDhan Nirankar.
ReplyDelete😂😂🙏🙏🙏
Dhan Nirankar.
ReplyDelete😂😂🙏🙏🙏
😀😀 acha ji 😀😀
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