फूल कितना भी सुन्दर हो -
तारीफ़ ख़ुशबू से होती है
इंसान कितना भी बड़ा हो -
क़दर उसके गुणों से होती है
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Dhan Nirankar 🙏🙏🙏🙏
निज़ाम-ए-मैकदा बिगड़ा हुआ है इस क़दर साक़ी उसी को जाम मिलता है जिसे पीना नहीं आता ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ Nizaam-e-maikada bigadaa hua hai i...
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ReplyDeleteDhan Nirankar
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